Monday, 25 June 2012

गजल


गजल-१४
 
बौआ के छटिहारक राइत मिथिला-विधिए नियारल काजर 
शुभग - सिनेहक ठोप करिकबा मौसी हाथक पारल काजर
 
नवरातिक अहि शुभ-बेला में अबै अष्टमिक राति डेराओन
माय अपन संतति सभके तें आंखि दुनु चोपकारल काजर
 
अन्हरिया राति अमावस के ई दीप - पुंज मुंह दूइश रहल    
राइत दिवालिक लेसल टेमी तंत्र - मन्त्र  उपचारल काजर 
 
कते सुहन्गर स्वप्न सजोने कजरायल आँखिक पेपनी पर
बरसाति -पंचमी- मधुश्रावनि नवकनिया के धारल काजर 
 
नव यौवन के नव तरंग इ  "नवल" मोन भसियेबे करतै 
गोर-गोर चन्ना सन मुंह पर सजनी कियै लेभारल काजर
 
 --- वर्ण- २४ ---
(सरल वर्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< २५.०६.२०१२ >

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