| गजल-१४ |
| बौआ के छटिहारक राइत मिथिला-विधिए नियारल काजर |
| शुभग - सिनेहक ठोप करिकबा मौसी हाथक पारल काजर |
| नवरातिक अहि शुभ-बेला में अबै अष्टमिक राति डेराओन |
| माय अपन संतति सभके तें आंखि दुनु चोपकारल काजर |
| अन्हरिया राति अमावस के ई दीप - पुंज मुंह दूइश रहल |
| राइत दिवालिक लेसल टेमी तंत्र - मन्त्र उपचारल काजर |
| कते सुहन्गर स्वप्न सजोने कजरायल आँखिक पेपनी पर |
| बरसाति -पंचमी- मधुश्रावनि नवकनिया के धारल काजर |
| नव यौवन के नव तरंग इ "नवल" मोन भसियेबे करतै |
| गोर-गोर चन्ना सन मुंह पर सजनी कियै लेभारल काजर |
| --- वर्ण- २४ --- |
| (सरल वर्णिक बहर) |
| ►नवलश्री "पंकज"◄ |
| < २५.०६.२०१२ > |
Monday, 25 June 2012
गजल
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