| गजल-१७ |
| काजर सन कजरौटो कारी भाग जगैयै काजर के |
| पाकि रहल कजरौटा त की सुख भेटैयै काजर के |
| लोक करइयै मोहित भ घाट-बाट काजर के चर्चा |
| कजरौटा के हाल के पूछत सभ देखैयै काजर के |
| अवहेलित कजरौटा खाली काजर नयन नचैयै |
| कोन धेने कजरौटा बैसल देखि जड़ैयै काजर के |
| कजरौटा के भाग सिया सन सुख सपनेहु नै भेल |
| टेमी सँ पुछियऊ ओ सभटा भेद बुझैयै काजर के |
| "नवल" हाथ लेती कजरौटा फेर लगेती काजर ओ |
| अहि मोह में फंसि कजरौटा फेर पोसैयै काजर के |
| --- वर्ण- २० --- |
| (सरल वर्णिक बहर) |
| ►नवलश्री "पंकज"◄ |
| < २६.०६.२०१२ > |
Monday, 25 June 2012
गजल
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment